(मुकेश नामा)कस्बे में प्राचीन नादिया बाग वर्षों तक देखरेख के अभाव में उपेक्षा का शिकार रहा। छह माह पूर्व यहां डेरा जमाने वाले संत देवानंद सरस्वती की जिद और शिव भक्तों की श्रद्धा व सहयोग से अब यहां का दृश्य पूरी तरह बदला हुआ है।
किले के पीछे व तालाब के मुहाने पर स्थित प्राचीन शिवालय भू-माफियाओं के चंगुल में आकर सिकुड़ता जा रहा था। चारों और झाड़-झंझाड़ उगने से यहां तक पहुंचने का सुगम रास्ता भी नहीं था। श्रावण मास में भी शिव उपासक यहां पूजा-अर्चना व दर्शनों के लिए नहीं पहुंच पाते थे।
छह माह पूर्व उज्जैन अखाड़े से पहुंचे संत बाबा देवानंद सरस्वती यहां की बदहाल अवस्था से व्यथित हुए और उन्होंने यहीं डेरा डाल दिया। उनकी जिद के सामने कई शिव उपासक नतमस्तक हो गए और उन्होंने आपसी सहयोग से कई विकास कार्य करते हुए प्राचीन नादिया बाग की तस्वीर को बदल दिया। अब यहां श्रद्धालु भी आस्था के साथ पहुंचने लगे हैं। साथ ही कई धार्मिक अनुष्ठान भी किए जाने लगे हैं।
शिवभक्तों ने जनसहयोग से कराए कई विकास कार्य
प्राचीन नादिया बाग की बदहाल अवस्था को बदलते हुए शिव भक्त नरेश राठौर, संजय गर्ग, देवीशंकर सुमन, बल्ला भार्गव, सुनील राठौर, मुकेश सोनी, कालू यादव, विष्णु ओझा, विक्की शाक्यवाल, योगेश भार्गव सहित लोगों ने यहां पत्थरों का कोट करवाया। नादिया की विशाल प्रतिमाओं को चबूतरे पर स्थापित कर रेलिंग लगवाई, नागा साधु देवानंद सरस्वती के लिए धूनी कक्ष एवं भंडार कक्ष का निर्माण करवाया।
पक्का रोड ट्यूबवेल, पक्की चारदीवारी एवं मंदिर निर्माण की योजना है।
बिखरी दर्जनों कलात्मक प्रतिमाओं को सहेजा: नादिया बाग में शिव भक्तों ने चारों ओर खंडित अवस्था में बिखरी पड़ी दर्जनों प्राचीन कलात्मक प्रतिमाओं को एक चबूतरे पर सहेज कर रखा। इन मूर्तियों में मां दुर्गा, गणेश, वीर रूप हनुमान, भैरव, सति, विष्णु, महावीर स्वामी, नटराज सहित कई प्रतिमाएं शामिल हैं। वर्षों से देखरेख के अभाव में यहां से कई प्राचीन मूर्तियां चोरी भी जा चुकी हैं।
नादिया बाग के लिए यह किंवदंती है प्रचलित
इस बाग में विशालकाय पत्थरों से बनी दो नादियों की आदम कद प्राचीन प्रतिमाए एक ही सीध में स्थापित हैं। जो सामने पीपल के वृक्ष की जड़ों से निकल रहे प्राचीन शिवलिंग की मूरत को निहारती हुई प्रतीत होती है। किवदंती है कि सैंकड़ों वर्ष पूर्व केलवाड़ा का नादिया, राई का भैरव व कोटरागढ़ की माता, तीनों कलात्मक प्रतिमाओं का निर्माण एक ही कारीगर ने किया था।
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